Lyric Poem 🔼

Lyric poetry   ⬆️

Lyricist – Jotsna Jari

 .

 Who doesn’t understand  

 the language of eyes  

 What will be the use of telling him  

 by word of mouth 

 How beautiful the moon is 

 Yet it is far away.

 .

 Why didn’t I tell you 

 all my feelings 

 Even today 

 you don’t come back

 How much dew falls

 between the leaves. 

 .

 I draw in silence 

 only I want him

 I lose you  as much as I want

 still I want you. 

 .

 The noise has stopped

 I have become silent 

 Even if the festival comes…  

 I am not happy anymore 

 Who peeps 

 in the gap of mind. 

🟩

Лирическая поэзия   ⬆️

 Автор текста – Йотсна Яри

 .

 Кто не понимает

 язык глаз

 Какой смысл говорить ему

 устно

 Как прекрасна луна

 И все же это далеко.

 .

 Почему я не сказал тебе

 все мои чувства

 Даже сегодня

 ты не вернешься

 Сколько росы выпадает

 между листьями.

 .

 я рисую в тишине

 только я хочу его

 Я теряю тебя столько, сколько хочу

 все же я хочу тебя.

 .

 Шум прекратился

 я замолчал

 Даже если наступит праздник…

 я больше не счастлив

 Кто подглядывает

 в промежутке разума.

🟧 


গীতি কবিতা   ⬆️

গীতিকার   –   জ্যোৎস্না জরি  

চোখের ভাষা  বুঝল না যে 

মুখে বলে  কি হবে তাকে 

চাঁদ কত সুন্দর 

তবু সুদূরে থাকে । 

কেন সব অনুভব 

বলা হল না 

আজও তুমি  

ফিরে এলে না 

কত শিশির ঝরে 

পাতার ফাঁকে । 

নিরিবিলি এঁকে যাই 

তাকে শুধু পেতে চাই 

যত চাই  তত যে হারাই 

তবু পেতে চাই । 

থেমে গেছে কলরব 

হয়েছি নীরব 

খুশি আর আসে না 

এলে যে পরব 

কে যেন উঁকি দেয় 

মনের ফাঁকে । 

🟨 

گیت شاعری۔

 نغمہ نگار – جوتسنا جری

 .

 جو نہیں سمجھتا

 آنکھوں کی زبان

 اسے بتانے کا کیا فائدہ

 منہ کے لفظ سے

 چاند کتنا خوبصورت ہے۔

 پھر بھی یہ بہت دور ہے۔

 .

 میں نے تمہیں بتایا کیوں نہیں۔

 میرے تمام احساسات

 آج بھی

 تم واپس نہیں آنا

 کتنی اوس پڑتی ہے۔

 پتیوں کے درمیان.

 .

 میں خاموشی سے کھینچتا ہوں۔

 صرف میں اسے چاہتا ہوں۔

 میں تمہیں جتنا چاہوں کھو دیتا ہوں۔

 پھر بھی میں تمہیں چاہتا ہوں۔

 .

 شور تھم گیا ہے۔

 میں خاموش ہو گیا ہوں۔

 تہوار بھی آئے تو…

 میں اب خوش نہیں ہوں۔

 جو جھانکتا ہے۔

 دماغ کے خلا میں.

🟦 

गीत कविता   ⬆️

 गीतकार – जोत्सना जरी

 .

 कौन नहीं समझता

 आँखों की भाषा

 उसे बताने से क्या फायदा

 मुंह के वचन के द्वारा

 चाँद कितना ख़ूबसूरत है

 फिर भी दूर है।

 .

 मैंने आपको क्यों नहीं बताया

 मेरी सारी भावनाएं

 आज भी

 तुम वापस मत आना

 कितनी ओस पड़ती है

 पत्तों के बीच।

 .

 मैं मौन में आकर्षित करता हूँ

 केवल मैं उसे चाहता हूँ

 मैं तुम्हें जितना चाहता हूं उतना खो देता हूं

 फिर भी मैं तुम्हें चाहता हूँ।

 .

 शोर थम गया है

 मैं चुप हो गया हूँ

 त्योहार आए भी तो…

 मैं अब खुश नहीं हूँ

 कौन झांकता है

 मन की खाई में। 

💙

Leave a Comment