কবিতা : তথৈবচ 🔼

কবিতা: তথৈবচ 

কবি    :  জ্যোৎস্না জরি 

নমস্কার  শুভ সময় 

কেমন আছো সব  

ঘর দোর  স্বপ্ন রোদ 

সব ঠিক ঠাক  ? 

আমার বাপু  বোশেখ এলে 

বুক ঢিপ ঢিপ 

চারদিকে কেমন 

কান্না কান্না ভাষা 

ছটফট  ছটফট করে… 

শুধু বোশেখ কেন 

সারাটা জীবন জোড়া ঝড় 

শিলা বিষ্টির মারধোর 

কেমন যেন পাগোল পাগোল লাগে । 

উঠোনে দাঁড়ালে 

এক চিলতে আকাশ 

চোখ রগড়ায়  

ভয় পেয়ো না বন্ধু… 

মানব বন্ধনে বেঁধে দেব সুখ…  । 

🌴 

Lyric poem 🔼

Lyric Poem   ⬆️

Lyricist :   Jotsna Jari 

.

 Here is the forest

 some songs are reserved 

 just for you.

 .

 Come to me in silence 

 just sit side by side 

 our souls will be filled.  

 .

 

 

Between rows of trees on both sides

here is light and shadow landscape

there is pride of trees.

 .

 As much pain as there in my chest    

 you will remove all the pain  

 by forgetting ego. 

Лирическое стихотворение 🔼

Лирическое стихотворение   ⬆️

 Автор слов: Йотсна Яри

 .

Вот лес

 некоторые песни зарезервированы

 для тебя.

.

Подойди ко мне в тишине

 просто сиди рядом

 наши души будут наполнены.

 .

 Между рядами деревьев по обе стороны

 есть прикосновения

 в бок о бок свет и тень.

 .

 Столько боли, сколько в моей груди

 ты уберешь всю боль

 забыв гордыню.

গীতি কবিতা 🔼

গীতি কবিতা  

গীতিকার  :   জ্যোৎস্না জরি 

.

এখানে অরণ্য    

শুধু তোমারি জন্যে    

রাখা আছে কিছু গান । 

.

নিরিবিলি কাছে এসো    

পাশাপাশি শুধু বসো     

ভরে যাবে প্রাণ ।  

.

দুদিকে গাছের সারি       

আলো ছায়া আড়াআড়ি       

করে অভিমান ।   

.

বুকে যত ব্যথা আছে      

 সব কিছু দেবে মুছে    

ভুলে অভিমান । 

گیت کی نظم

گیت کی نظم 

 نغمہ نگار: جوتسنا جری

 .

 یہاں جنگل ہے۔

 کچھ گانے محفوظ ہیں۔

 صرف تمہارے لیے.

 .

 خاموشی سے میرے پاس آؤ

 بس ساتھ ساتھ بیٹھو

 ہماری روحیں بھر جائیں گی۔

 .

 دونوں طرف درختوں کی قطاروں کے درمیان

 ٹچنس ہے

 ساتھ ساتھ روشنی اور سائے میں۔

 .

 میرے سینے میں جتنا درد ہے۔

 آپ تمام درد کو دور کریں گے

 غرور کو بھول کر

गीत कविता 🔼

गीत कविता   ⬆️

 गीतकार :   जोत्सना जरी

 .

यहाँ जंगल है

 कुछ गाने आरक्षित हैं

 सिर्फ तुम्हारे लिए।

 .

चुपचाप मेरे पास आओ

 बस कंधे से कंधा मिलाकर बैठो

 हमारी आत्मा भर जाएगी।

 .

दोनों ओर पेड़ों की पंक्तियों के बीच

 स्पर्श है

 अगल-बगल में प्रकाश और छाया।

 .

मेरे सीने में जितना दर्द है

 आप सारे दर्द दूर कर देंगे

 अभिमान को भूलकर। 

“deepest sorrow & deepest love 

 blossoms my heart. 

 I can’t say this words 

 only it’s poetic art.” 

   – Jotsna Jari.  

    🍹  🍹  🍹

Poetry :  Ding Dong 

Poet :  Jotsna Jari 

Don’t miss  touch my mind 

Don’t late  near my song 

I can’t forget Ding Dong Dong. 

Fairy childhood  fly my eyes 

Little dreams always come 

Give a plenty  highly charm.  

      💦       💦       💦

शायरी – सुकांत को याद करना 🔼

शायरी – सुकांत को याद करना  ️⬆️ 

 कवि – जोत्सना जरी

 .

 आइए…   आइए दुनिया को रहने लायक बनाएं

 जहां हम सारे जहर खत्म कर देते हैं

 सपनों की सुनहरी धूप में

 धान को मुस्कुराने दो

 .

 आइए…   आइए दुनिया को रहने लायक बनाएं

 समाचार पृष्ठ पर अच्छे शब्द

 चलो घूमें

 और सीटी

 .

 आइए…   आइए दुनिया को रहने लायक बनाएं

 बचपन और उड़ने वाला घोड़ा

 परियों की कहानी में लिपटे…

 मुझे सब कुछ पाना है

 .

 सुकांत, आपको सलाम कवि

 इसलिए मैं बार-बार पेंट करता हूं

 आपकी सोच की तस्वीर

.

 [एन.बी-

 सुकांत भट्टाचार्य  :            

( 15 अगस्त 1926 – 13 मई 1947)।  

वह एक बंगाली कवि और नाटककार थे।

 उन्हें ‘यंग नजरूल’ और ‘किशोर विद्रोही कोबी’ कहा जाता था।  ब्रिटिश राज के अत्याचार और सामाजिक अभिजात वर्ग द्वारा अपनी कविता के माध्यम से उत्पीड़न के खिलाफ सुकांत के समान विद्रोही रुख।  भारत को आजादी मिलने से तीन महीने पहले तपेदिक से उनकी मृत्यु हो गई थी।  ]

🌱 

شاعری – سکانتا کو یاد کرنا


🌀 

شاعری – سکانتا کو یاد کرنا 

 شاعر – جوتسنا جری

 .

 آؤ… دنیا کو رہنے کے قابل بنائیں

 جہاں ہم تمام زہر کو ختم کرتے ہیں۔

 خواب کی سنہری دھوپ میں

 دھان کو مسکرانے دو

 .

 آؤ… دنیا کو رہنے کے قابل بنائیں

 خبروں کے صفحے پر اچھے الفاظ

 چلو گھومتے ہیں

 اور سیٹی

 .

 آؤ… دنیا کو رہنے کے قابل بنائیں

 بچپن اور اڑنے والا گھوڑا

 پریوں کی کہانی میں لپٹی…

 میں سب کچھ حاصل کرنا چاہتا ہوں۔

 .

 سکانتا، شاعر آپ کو سلام

 تو میں بار بار پینٹ کرتا ہوں۔

 آپ کی سوچ کی تصویر

.

 [این بی-

 سکانتا بھٹاچاریہ  :  (15 اگست 1926 – 13 مئی 1947)۔  وہ بنگالی شاعر اور ڈرامہ نگار تھے۔

 انہیں ‘ینگ نذر’ اور ‘کشور بیدروہی کوبی’ کہا جاتا تھا۔  برطانوی راج کے ظلم اور سماجی اشرافیہ کے جبر کے خلاف سکانتا کا اسی طرح کا باغیانہ موقف اپنی شاعری کے ذریعے پیش کیا گیا۔  ہندوستان کی آزادی سے تین ماہ قبل تپ دق کی وجہ سے ان کا انتقال ہوگیا۔  ]

💦 

কবিতা : সুকান্তকে মনে রেখে 🔼

কবিতা –  সুকান্তকে মনে রেখে   ⬆️

কবি –  জ্যোৎস্না জরি  

এসো পৃথিবীকে বাসযোগ্য 

করে যাই 

তুলে নেই  যেখানে যত বিষ 

স্বপ্নের সোনালী রোদে 

হাসুক ধানের শিষ 

এসো পৃথিবীকে বাসযোগ্য 

করে যাই 

খবরের পাতা জুড়ে 

ভালো কথা  ঘুরে ঘুরে 

দিয়ে যাক শিস 

.

এসো পৃথিবীকে বাসযোগ্য 

করে যাই 

ছেলেবেলা আর রূপকথা মোড়া  

উড়ে যাওয়া ঘোড়া 

সব কিছু পেতে চাই  

সুকান্ত, স্যালুট তোমাকে কবি 

তোমার ভাবনার ছবি 

বার বার  আঁকি তাই  ।

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